गुणों से भरपूर ब्लैक राइस की बढ़ती मांग.. काला चांवल की खेती से किसान हो सकते हैं मालामाल.. जानिए काला चांवल के फायदे..

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काला चांवल की खेती : किसान भइयों काला चांवल के मांग दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं, काला चांवल में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो कि शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है कई तरह के गुणों से भरा होता है काला चांवल। इसीलिए मार्केट में काला चांवल का मांग बढ़ता जा रहा है काला चावल मार्केट पर अच्छे खासे दम पर बिक रहे हैं। क्योंकि इसकी उत्पादन भी कम है और मांग अधिक है ऐसे में अगर आप ब्लैक राइस की खेती करके अच्छी खासी मुनाफा कमा सकते हैं। आज हम जानेंगे काला चांवल के कौन-कौन से फायदे होते हैं और किसान इसकी खेती किस तरह से कर सकते हैं। तो पूरी खबर पूरी जानकारी के लिए पूरी पोस्ट पर बने रहियेगा।

जानिए काला चांवल के खासियत.. 

इन दिनों काला चांवल की खेती की चर्चा काफी ज्यादा है और हो भी क्यों ना इसकी डिमांड जो विदेशों तक है। काला चांवल में काफी औषधि गुण पाए जाते हैं जो की सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। सफेद चावल की खेती तो दुनिया भर में होती है लेकिन काले चावल की खेती कुछ ही किसान करते हैं आपको बता दें कुछ वर्षों पहले तक यह काले चावल के खेती मणिपुर और असम में की जाती थी लेकिन अब इसकी खेती उत्तर प्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में सफलतापूर्वक की जा रही है। 

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काला चांवल का मांग क्यों बढ़ता जा रहा है ? 

जानकार बताते हैं काले चावल में कुछ औषधि गुण पाए जाते हैं जैसे काला चांवल का सेवन से कैंसर वह हृदय संबंधित बीमारियों से बचाने में सहायक होता है। यह प्रोटीन का अच्छा साधन है 10 ग्राम काला चांवल में करीब 9 ग्राम प्रोटीन की मात्रा इसमें पाई जाती है इसमें फाइबर और आयरन की भरपूर मात्रा पाई जाती है और मधुमेह यानी डायबिटीज वाले पेशेंट भी इसका यानी काले चावल का सेवन कर सकते हैं क्योंकि इसमें शुगर नाम मात्रा पाई जाती है इसलिए काले चावल का सेवन डायबिटीज वाले पेशेंट भी कर सकते हैं।

अधिक मात्रा में पोशाक तत्व : काला चांवल में अधिक मात्रा में कई पोशाक तत्व पाए जाते हैं जैसे कैल्सियम, जिंक, मैंगनीज है ये सारे पोशाक तत्व इसमें मौजूद होते हैं। 

काला चांवल की खेती कैसे करें ? 

चलिए अब जानते हैं आप काला चांवल की खेती कैसे कर सकते हैं किसान भाई अपने खेत में इसको बुवाई कर सकते हैं काले चावल की खेती भी बिल्कुल सफेद चावल खेती जैसे ही करते हैं। इसमें क्या होता है की काला चांवल की खेती में जैविक खाद का ही उपयोग किया जाता है और सफेद चावल में भरपूर मात्रा में रसायन का प्रयोग किया जाता है। 

नर्सरी : अगर आप इसकी नर्सरी तैयार करना चाहते हैं तो नर्सरी के लिए मई-जून का समय इसके लिए उपयुक्त है और इसमें नर्सरी तैयार होने में करीब 1 महीने का समय लगता है।

समय अवधी : किसान भइयों आपको एक बात और बता दें की अन्य किस्मो की तुलना में काले चावल का समय अवध ज्यादा है इसमें करीब पंच से छह महीने में आपकी फसल पक कर तैयार होती है काटने लायक और इसके पौधे मजबूत होते हैं।

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करीब 6 फीट तक इसकी ऊंचाई :  काला चांवल पौधे की ऊंचाई करीब 6 फीट तक इसकी ऊंचाई होती है। 

खाद : काला चांवल की खेती में जैविक खाद का ही उपयोग किया जाता है। बुआई और उसके बाद नियमित समय अनुसार खाद का उपयोग करना होता है. इसमें जैसे की जैविक खाद या कंपोस्ट खाद का उपयोग करके आप इससे अच्छी फसल तैयार कर सकते हैं। 

काला चांवल की खेती से किसानों को फायदा..

इसका सबसे बड़ा एक फायदा तो यही है की इसमें जैविक तरीके से तैयार होता है जो की सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है और दूसरा इसमें जैसे की अन्य किस्म तुलना में इसमें खर्चा कम होता है जैसे की इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है जिससे की इसमें कीटो रोगों का प्रकोप कम होता है जैविक होने कारण अधिक मूल्य पर इसकी बिक्री होती है जिससे इससे मुनाफा भी आपको अधिक हो सकता है। 

काला चांवल में ज्यादा खर्च नहीं होता जैसे की जो सफेद चावल होता है उसमें आपको तरह-तरह की रासायनिक चीजों का प्रयोग करना पड़ता है इसलिए उसमें थोड़ा खर्चा ज्यादा हो जाता है। 

उत्पादन : काले चावल के उत्पादन सफेद चावल की तुलना में कम होता है महज करीब 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से इसमें उत्पादन होता है लेकिन इसका मूल्य अच्छा होने कारण इसमें आपका अच्छा खास मुनाफा हो सकता है। जानकार बताते हैं इसका 1 किलो का रेट 100 रुपये से लेकर 300 रुपये प्रति किलो हिसाब से इसका चावल मिलता है इससे आपको बाजार में अच्छा खास मुनाफा कमा सकते हैं। 

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और  जानकारियों पर आधारित है. फ़सलों के उत्पादन में सिंचाई प्रबंधन खाद प्रबंधन, धान का उत्पादन क्षेत्र के जलवायु अनुसार भी निर्भर करता है। इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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